देहरादून। हिमालय दिवस के अवसर पर राजधानी देहरादून में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराज’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हिमालय की समृद्ध प्राकृतिक व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और पर्वतीय क्षेत्रों के सतत एवं समावेशी विकास पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति (इकोलॉजी और इकोनॉमी) के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करते हुए प्रदेश के विकास को नई दिशा दे रही है।
हिमालय केवल बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं का नाम नहीं, बल्कि यह देश की समृद्ध प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जैव विविधता की अमूल्य धरोहर है। हिमालय दिवस के अवसर पर देहरादून में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराज’ कार्यक्रम में हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण, संवर्धन और सतत विकास को लेकर व्यापक विचार साझा किए गए। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में कहा गया कि हिमालयी क्षेत्रों का विकास ऐसा होना चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके। सरकार की ओर से इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन कायम करते हुए प्रदेश के सतत एवं समावेशी विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। हिमालय की प्राकृतिक विरासत के साथ-साथ यहां की लोक संस्कृति, परंपराएं और जीवनशैली भी इसकी विशिष्ट पहचान हैं। ऐसे में विकास योजनाओं में हिमालय की संवेदनशील भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। वक्ताओं ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को हिमालयी चुनौतियों से निपटने का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े कई महत्वपूर्ण आयोजनों के पोस्टर का भी विमोचन किया गया। इनमें द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग-2026, बागेश्वर में प्रस्तावित पंचम सीमांत पर्वतीय बाल विज्ञान महोत्सव, द्वितीय ज्ञानोत्कर्ष-2026, देहरादून इंटरनेशनल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी फेस्टिवल के सातवें संस्करण तथा 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन के पोस्टर शामिल रहे। इसके साथ ही ‘विज्ञान संप्रेषण’ पत्रिका का भी विमोचन किया गया। इन आयोजनों के जरिए प्रदेश में वैज्ञानिक चेतना, नवाचार और विद्यार्थियों के बीच विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में विधायक किशोर उपाध्याय, हेस्को के संस्थापक एवं पद्म पुरस्कार से सम्मानित डॉ. अनिल प्रकाश जोशी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। हिमालय दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि हिमालय का संरक्षण केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और उत्तराखंड के संतुलित विकास की भी बुनियाद है।

