Feb 11, 2026

सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तराखंड पुलिस ने साइबर ठगी से 70 करोड़ रुपये बचाए

post-img

देहरादून। उत्तराखंड में साइबर ठगी एक गंभीर और भयावह चुनौती बनकर उभरी है। बदलती तकनीक के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार नए और खतरनाक होते जा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि बीते पांच वर्षों में प्रदेश में साइबर ठगी के मामलों में 12 गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान करीब 90 हजार लोग ठगी का शिकार हुए हैं, जबकि ठगों ने प्रदेशवासियों से 468 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हड़प ली है। साइबर ठगी की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे “सरासर लूट” की संज्ञा दी है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच उत्तराखंड में साइबर अपराध लगातार बढ़े हैं। जहां वर्ष 2021 में 4,492 शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 31,870 तक पहुंच गई। इसी अवधि में ठगी की रकम 15 करोड़ रुपये से बढ़कर 177.81 करोड़ रुपये तक जा पहुंची।

हालांकि, सीमित संसाधनों के बावजूद उत्तराखंड पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लोगों की बड़ी रकम बचाने में भी सफलता हासिल की है। बीते पांच वर्षों में पुलिस करीब 70 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की रकम को समय रहते बचाने में कामयाब रही है। केवल वर्ष 2024 और 2025 में ही 58 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सुरक्षित कराई गई।साइबर ठग हर साल नए-नए तरीके अपना रहे हैं। वर्तमान में सबसे खतरनाक ट्रेंड “डिजिटल अरेस्ट” का भय दिखाकर ठगी करने का सामने आया है। पिछले पांच वर्षों में इस तरीके से 37 लोगों को निशाना बनाया गया और उनसे करोड़ों रुपये ठग लिए गए। इसके अलावा ऑनलाइन ट्रेडिंग, फेक कॉल और एसएमएस, सोशल मीडिया गिफ्ट स्कैम, फर्जी कॉल सेंटर और वेबसाइट हैकिंग जैसे मामले भी सामने आए हैं। वर्ष 2024 में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर सबसे अधिक ठगी के मामले दर्ज किए गए।पुलिस द्वारा सोशल मीडिया, कॉलरट्यून और अन्य माध्यमों से लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर के अनुसार, “लोगों की मेहनत की कमाई को बचाने के लिए पुलिस त्वरित कार्रवाई कर रही है। भविष्य में साइबर अपराध से निपटने के लिए संसाधनों और तकनीकी क्षमता को और मजबूत किया जाएगा।” बढ़ते साइबर अपराधों के बीच विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और सतर्कता ही ठगी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।