पर्यावरण प्रेमियों की मांग, पेड़ काटने के बजाय देहरादून-ऋषिकेश मार्ग पर बने एलिवेटेड सड़क

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देहरादून। उत्तराखंड के पर्यावरण और विकास के बीच चल रही एक बड़ी जंग में पर्यावरण प्रेमियों को बड़ी सफलता मिली है। बहुप्रतीक्षित देहरादून-ऋषिकेश सिक्स लेन परियोजना के भानियावाला-ऋषिकेश खंड पर काटे जा रहे 3 हजार से अधिक पेड़ों के कटान पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सीएम धामी द्वारा सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ कटान स्थगित करने की घोषणा के बाद आंदोलनकारियों और पर्यावरण प्रेमियों की बाछें खिल गई हैं। इस फैसले को पर्यावरण के मोर्चे पर एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, धरातल पर लड़ाई लड़ रहे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह जीत अभी अधूरी है, क्योंकि सरकार ने कटान को केवल 'स्थगित' किया है, पूरी तरह 'निरस्त' नहीं। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद जब ग्राउंड जीरो (सात मोड़) पर जाकर प्रदर्शनकारियों से बात की गई, तो वहां खुशी के साथ-साथ सतर्कता का माहौल भी दिखा। आंदोलन से जुड़ी शालू नामक महिला ने बताया यह कटान पूरी तरह रुका नहीं है, इसे सिर्फ कुछ समय के लिए स्थगित किया गया है। हमारी मांग है कि इस महत्वपूर्ण एलिफेंट कॉरिडोर को बचाने के लिए हाईवे को जमीन पर चौड़ा करने के बजाय 'एलिवेटेड सड़क' बनाई जाए। विकास ऐसा हो जिससे प्रकृति को कम से कम क्षति पहुंचे। 

आंदोलनकारियों का कहना है कि 9 दिनों तक दिन-रात भूखे-प्यासे रहकर की गई कड़ी मेहनत और स्थानीय जनता के अटूट सहयोग के कारण ही सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है। इस पूरे आंदोलन में शनिवार को उस समय एक बड़ा मोड़ आया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मार्ग से गुजर रहे थे। प्रदर्शन कर रही युवती मेघा ने बताया कि उन्होंने राहुल गांधी के काफिले को रोककर उन्हें तीन हजार पेड़ों के कटान और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से अवगत कराया। राहुल गांधी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस मुद्दे को संसद में उठाने का भरोसा दिया। इस घटनाक्रम के ठीक अगले दिन मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा कटान स्थगित करने की जानकारी साझा की गई। सामाजिक संगठनों ने इसके लिए विपक्ष और सरकार दोनों के रुख का संज्ञान लिया है। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष और पर्यावरण प्रेमी मोहित उनियाल ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए बताया कि आंदोलन और विरोध के बावजूद इस क्षेत्र में लगभग 700 से अधिक बेशकीमती पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं। उन्होंने कहा, "हमें डेढ़ साल पहले इस योजना की भनक लगी थी, तब हमने इन पेड़ों पर रक्षा सूत्र बांधकर इन्हें बचाने की कसम खाई थी। यह मौसम पक्षियों के प्रजनन का है, ऐसे में पेड़ों को काटना पाप के समान है। भौगोलिक दृष्टि से यह पूरा क्षेत्र एक संवेदनशील एलिफेंट कॉरिडोर है। ऋषिकेश-भानियावाला के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए कुल 3,300 पेड़ों को चिन्हित किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सभी पेड़ काट दिए गए, तो न सिर्फ हाथियों का रास्ता बंद हो जाएगा बल्कि अन्य जंगली जानवरों की दिनचर्या और इंसानी बस्तियों में उनका प्रवेश बढ़ जाएगा। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड में प्रकृति को भगवान का रूप माना जाता है, इसलिए विकास के नाम पर इस हरियाली की हत्या बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस फैसले के बाद ढीले नहीं पड़ने वाले हैं। आने वाले दिनों में यदि सरकार ने परियोजना के डिजाइन में बदलाव कर पेड़ों को पूर्ण सुरक्षा नहीं दी, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। फिलहाल सात मोड़ पर पर्यावरण प्रेमी लगातार नजर बनाए हुए हैं।