पिथौरागढ़ में पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर का युद्धस्तर पर अपग्रेडेशन: दुर्गम क्षेत्रों में बन रहे नए लॉज और रेस्टोरेंट

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देहरादून। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में स्थित पवित्र 'आदि कैलाश' और 'ओम पर्वत' की यात्रा देश के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक नया इतिहास रच रही है। एक समय बेहद दुर्गम और उपेक्षित माने जाने वाले इस सीमांत क्षेत्र में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आमद इस कदर बढ़ गई है कि अब सरकार यहाँ तक पहुँचने के लिए सीधी हवाई सेवाएं शुरू करने की बड़ी प्लानिंग में जुट गई है। कभी सालाना महज 300 यात्रियों की मेजबानी करने वाले आदि कैलाश में इस साल मई महीने से अब तक रिकॉर्ड 52,000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इस भारी क्रेज को देखते हुए अब यहाँ रहने, खाने और परिवहन के बुनियादी ढाँचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को युद्धस्तर पर अपग्रेड किया जा रहा है।

आदि कैलाश यात्रा में आए इस ऐतिहासिक उछाल के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन माना जा रहा है। साल 2015 से 2018 तक यहाँ पहुंचने के लिए पक्की सड़कें नहीं थीं, जिसके कारण दुर्गम रास्तों पर पैदल चलने वाले यात्रियों की संख्या सालाना 300 से भी कम हुआ करती थी। साल 2019 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भी पूरे साल में सिर्फ 322 यात्री ही यहाँ पहुंचे थे। लेकिन 12 अक्टूबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद पिथौरागढ़ पहुंचकर आदि कैलाश के साक्षात दर्शन किए और पार्वती कुंड व शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। पीएम मोदी के इस दौरे के बाद देश-दुनिया में इस स्थल को लेकर भारी आकर्षण पैदा हुआ। इसका असर यह हुआ कि पिछले साल यानी 2025 में पर्यटकों की संख्या 36,000 तक पहुंच गई, और इस साल मानसून शुरू होने से पहले ही यह आंकड़ा 52,000 को पार कर चुका है। पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि मानसून के बाद इस साल के अंत तक यह संख्या 1 से 1.5 लाख तक पहुंच जाएगी। श्रद्धालुओं की इस अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए अब आदि कैलाश तक हवाई सेवा शुरू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के एसीईओ संजय टोलिया ने बताया कि उत्तराखंड के साथ-साथ देश की राजधानी दिल्ली से भी इस क्षेत्र के लिए हवाई सेवा शुरू करने की भारी डिमांड आ रही है। कई निजी एविएशन कंपनियां यहाँ अपनी सेवाएं देने के लिए बेहद इच्छुक हैं। निकट भविष्य में इस सेवा के शुरू होने से न केवल आदि कैलाश, बल्कि 'ओम पर्वत' और सरकारी अनुमति के बाद 'लिपू दर्रा' जाने वाले यात्रियों का सफर भी बेहद आसान और सुगम हो जाएगा। पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि इस क्षेत्र में अचानक बढ़ी पर्यटकों की तादाद से कुछ नई व्यावहारिक चुनौतियां भी पैदा हो गई हैं। चूँकि यह इलाका बेहद दुर्गम और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है, इसलिए इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए अचानक रुकने और खाने-पीने की पर्याप्त व्यवस्था मौजूद नहीं थी। इन चुनौतियों से निपटने के लिए अब सीमांत गांवों में तेजी से नए लॉज, रेस्टोरेंट और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि इस कार्य में स्थानीय प्रशासन ग्रामीणों की पूरी मदद ले रहा है। आदि कैलाश यात्रा के इस स्वर्णिम काल ने स्थानीय आर्थिकी की तकदीर बदल दी है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में 'होमस्टे' खुल रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों को अपने ही घर में रोजगार मिल रहा है। इस आर्थिक समृद्धि का सबसे सुखद पहलू यह है कि रोजगार की तलाश में जो लोग कभी शहरों की तरफ पलायन कर गए थे, वे अब 'रिवर्स पलायन' के तहत वापस अपने पैतृक गांवों में लौटकर निवास करने लगे हैं।