Apr 04, 2026

विशेषज्ञ डॉक्टरों को पहाड़ भेजने के लिए 50 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन: स्वास्थ्य मंत्री ने रोस्टर प्रणाली से सुधारी व्यवस्था

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देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। अब रोस्टर पोस्टिंग के फॉर्मूले के तहत डॉक्टरों को पहाड़ में 6 महीने की पोस्टिंग दी जाएगी, जिसके बाद उन्हें मैदान में वापस बुला लिया जाएगा। साथ ही गर्भवती महिलाओं के प्रसव के मामलों में अस्पतालों की एंबुलेंस को भी 108 एंबुलेंस की तरह इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया है।

स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और पर्वतीय इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत करने के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि पर्वतीय क्षेत्रों में रोड कनेक्टिविटी न होने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण कई मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही अपनी जान गंवा देते हैं। मंत्री ने बताया कि 19 अप्रैल से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है। यात्रा के दौरान हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, कार्डियक अरेस्ट और एक्सीडेंट जैसे मामलों को ध्यान में रखते हुए दून मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में 20-20 डॉक्टरों के दो बैच तैयार किए जा रहे हैं। इन डॉक्टरों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है ताकि इस बार चारधाम यात्रा के दौरान पिछले वर्षों की तुलना में श्रद्धालुओं की मौत के आंकड़े कम रहें। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी पर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, “हम जबरदस्ती किसी डॉक्टर को नहीं भेज सकते। जो डॉक्टर काम करने को इच्छुक होंगे, उन्हें ही हायर किया जाएगा।” उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए 50 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन का प्रावधान है, फिर भी डॉक्टर नहीं आ रहे हैं। इस समस्या को हल करने के लिए अब रोस्टर पोस्टिंग का फॉर्मूला अपनाया जा रहा है। इसके तहत डॉक्टरों को पहाड़ में सिर्फ 6 महीने की पोस्टिंग दी जाएगी, जिसके बाद उन्हें वापस मैदानी क्षेत्र में भेज दिया जाएगा। इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होगी और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि जिन डॉक्टरों को सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा, उनके परिवार की सुरक्षा और बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए देहरादून और हल्द्वानी में डॉक्टर्स कॉलोनी बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। उनियाल ने कहा, “हर व्यक्ति को परिवार की सुरक्षा चाहिए। अगर डॉक्टर को लगेगा कि उनका परिवार सुरक्षित है और बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, तो वे पहाड़ में पूरे मन से काम करेंगे।” इस प्रस्ताव पर स्वास्थ्य विभाग जल्द ही अंतिम निर्णय लेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव पीड़ा के समय एंबुलेंस न मिलने की समस्या को दूर करने के लिए एक अहम फैसला लिया गया है। अब अस्पतालों की एंबुलेंस को भी डिलीवरी के मामलों में 108 एंबुलेंस की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। मंत्री ने बताया कि कई इलाकों में आज भी गर्भवती महिलाओं को कंधे पर या डंडी-कंडी पर लादकर मीलों पैदल ले जाना पड़ता है। सड़क कनेक्टिविटी में सुधार के बावजूद कुछ क्षेत्र अभी भी इससे वंचित हैं। ऐसे में अस्पताल की एंबुलेंस का तत्काल उपयोग कर महिला को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया जाएगा। अस्पतालों में सुधार पर जोर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने हाल ही में कई अस्पतालों का निरीक्षण किया है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में कुछ कमियां तो रहती ही हैं, लेकिन सफाई, डॉक्टरों की उपस्थिति और मरीजों को रेफर न करने जैसे सकारात्मक बदलाव दिख रहे हैं। उन्होंने डॉक्टरों से अपील की कि वे मरीज को भगवान मानकर सेवा भाव से काम करें। “डॉक्टर का पेशा सेवा का पेशा है। मरीज उम्मीद लेकर आता है कि डॉक्टर उसकी जान बचाएगा। हमें इस भावना को समझना चाहिए,” उन्होंने कहा। चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले स्वास्थ्य विभाग की ये तैयारियां प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के लिए राहत की खबर साबित हो सकती हैं। यदि रोस्टर पोस्टिंग, डॉक्टर्स कॉलोनी और एंबुलेंस नीति सही ढंग से लागू हुई तो पहाड़ के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।