Apr 18, 2026

बनबसा व्यापार मंडल अध्यक्ष भरत भंडारी की नेपाल से अपील: रोजमर्रा की चीजों को नए कस्टम ड्यूटी से रखें बाहर

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भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराने 'रोटी-बेटी' के रिश्तों और सुगम व्यापारिक संबंधों के बीच अब एक नई कड़वाहट पैदा होने की आशंका गहरा गई है। नेपाल की नई बालेन सरकार द्वारा सीमा पर कस्टम नियमों (भंसार) में सख्ती बरतने के फैसले ने उत्तराखंड के सीमावर्ती बाजारों, विशेषकर बनबसा और खटीमा के व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक संदेश तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारत से 100 रुपये से अधिक मूल्य का सामान लेकर नेपाल जाने पर अब अनिवार्य कस्टम शुल्क देना होगा। ईटीवी भारत की पड़ताल में यह बात सच साबित हुई है। नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां सीमावर्ती इलाकों में मुनादी करवाकर नागरिकों को इस नए नियम के प्रति सचेत कर रही हैं। हालांकि, यह आदेश करीब दो साल पुराना है, लेकिन पिछली सरकारों ने इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया था। अब बालेन सरकार इसे कड़ाई से लागू करने की तैयारी में है।

चंपावत जिले का बनबसा बाजार पूरी तरह से नेपाल से होने वाले व्यापार पर निर्भर है। यहाँ से रोजाना बड़ी मात्रा में किराना, कपड़े और रोजमर्रा का सामान नेपाल जाता है। बनबसा व्यापार मंडल के अध्यक्ष भरत भंडारी का कहना है कि दोनों देशों के बीच पिछले 60 वर्षों से निर्बाध व्यापार चल रहा है। यदि 100 रुपये जैसी मामूली राशि पर भी टैक्स वसूला गया, तो नेपाल के गरीब उपभोक्ता के लिए भारतीय सामान महंगा हो जाएगा। इसका सीधा परिणाम यह होगा कि नेपाल के ग्राहक सस्ते सामान की तलाश में अन्य रास्तों का रुख करेंगे, जिससे भारतीय सीमांत व्यापारियों का धंधा चौपट हो सकता है। नेपाल सरकार के इस फैसले का दोहरा असर होगा। एक तरफ जहाँ भारत का छोटा व्यापारी प्रभावित होगा, वहीं दूसरी ओर नेपाल की आम जनता, जो बनबसा बाजार से सस्ता सामान खरीदती है, उसे अब अपनी दैनिक जरूरतों के लिए अधिक जेब ढीली करनी होगी। व्यापार मंडल ने नेपाल सरकार से गुजारिश की है कि कम से कम दैनिक उपभोग की वस्तुओं को इस टैक्स के दायरे से बाहर रखा जाए, ताकि आम जनता और छोटे व्यापारियों का हित सुरक्षित रहे। फिलहाल यह नियम पूर्ण रूप से धरातल पर नहीं उतरा है, लेकिन नेपाल सरकार के रुख को देखते हुए माना जा रहा है कि इसे जल्द ही आधिकारिक रूप से अनिवार्य कर दिया जाएगा। भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ती इस हलचल ने दोनों देशों के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।