Mar 29, 2026

दीक्षांत समारोह के दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने घटते क्षेत्रफल के बावजूद उत्तराखंड कृषि उत्पादन में तीन गुना वृद्धि पर प्रकाश डाला

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देहरादून/पौड़ी गढ़वाल। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार (पौड़ी गढ़वाल) के तृतीय दीक्षांत समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचकर 283 छात्र-छात्राओं को स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी उपाधियां प्रदान कीं। समारोह की शुरुआत द्वीप प्रज्वलन से हुई। राज्यपाल ने सबसे पहले विश्वविद्यालय परिसर में स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पार्क में उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण किया। इसके बाद उन्होंने सभा कक्ष, ई-गवर्नेंस पोर्टल एवं ई-फाइलिंग डिजिटाइजेशन मॉड्यूल का उद्घाटन किया तथा प्रशासनिक व शैक्षणिक भवनों, ट्रांसिट हॉस्टल के निर्माण कार्य का शिलान्यास और बहुद्देशीय भवन का लोकार्पण भी किया। समारोह में बीएससी ऑनर्स की छात्रा साक्षी वर्मा, प्रदीप कुमार, संजना बिष्ट, मैत्रेय नौटियाल और युक्ता लोहनी को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। वहीं इशिता नेगी, सवेरा पंवार, श्वेता सेमवाल और सुहर्षिता बहुगुणा को रजत पदक से सम्मानित किया गया।

राज्यपाल गुरमीत सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि जीवन में नई जिम्मेदारियों की शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के निर्माण में करें। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में कृषि, औद्यानिकी और वानिकी क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनमें नवाचार और आधुनिक तकनीक अपनाना समय की मांग है। राज्यपाल ने कहा कि छात्र अपनी शिक्षा को व्यक्तिगत विकास तक सीमित न रखें, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों की चुनौतियों को अवसर में बदलें और शोध को किसानों तक पहुंचाएं। उन्होंने ईमानदारी, नैतिकता और सेवा भाव के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। इस अवसर पर पद्मश्री कृषि वैज्ञानिक डॉ. पी.एल. गौतम और प्रगतिशील किसान प्रेम चंद शर्मा को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय में नवाचार का सुंदर परिवेश है। कृषि, औद्यानिकी और वानिकी केवल आर्थिक विकास के साधन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरणीय पहचान के अभिन्न अंग हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, “आप केवल उपाधि नहीं ले रहे, बल्कि जिम्मेदारी भी स्वीकार कर रहे हैं। अपना ज्ञान और कौशल पर्वतीय कृषि की चुनौतियों को अवसर में बदलने में लगाएं और राज्य व राष्ट्र के कल्याण में योगदान दें।” कृषि एवं कृषक मंत्री गणेश जोशी ने सभी 283 उपाधि प्राप्तकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि राज्य बनने के बाद कृषि क्षेत्रफल भले ही कम हुआ हो, लेकिन उत्पादन तीन लाख टन बढ़ा है। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले मिलेट को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। कुलपति प्रो. परविंदर कौशल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि संस्थान शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पर्वतीय कृषि में नवाचार लाने के लिए प्रेरित किया। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय सोवेनियर, कॉफी टेबल बुक, विजन डॉक्यूमेंट 2027 और 14वीं ब्रेन स्टोर्मिंग सेशन की प्रोसिडिंग्स का विमोचन भी किया गया।