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गैरसैंण सत्र: कांग्रेस के बहिष्कार से रुका फोटो सेशन, स्पीकर ऋतु खंडूड़ी ने जताया खेद

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देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन के भीतर और बाहर सियासी पारा सातवें आसमान पर रहा। कार्यवाही शुरू होने से पूर्व कांग्रेस विधायकों के धरने से शुरू हुआ गतिरोध सदन के भीतर काले झंडे लहराने और बार-बार कार्यवाही स्थगित होने तक जारी रहा। भ्रष्टाचार, जनहित के मुद्दों और औपचारिक फोटो सेशन के बहिष्कार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष पूरी तरह आमने-सामने नजर आए। दिन की शुरुआत हंगामेदार रही। सदन की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में कांग्रेस के तमाम विधायक विधानसभा भवन के बाहर मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ गए। कांग्रेस विधायकों ने भ्रष्टाचार समेत राज्य के कई ज्वलंत मुद्दों को उठाते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान माहौल गरमाता देख सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल विपक्षी विधायकों को समझाने और सदन के भीतर लाने के लिए मौके पर पहुंचे, लेकिन विपक्ष अपने तेवरों पर अड़ा रहा। सदन परिसर में आयोजित होने वाले विधायकों के पारंपरिक फोटो सेशन को लेकर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष में तनातनी देखने को मिली। कांग्रेस विधायकों ने फोटो सेशन से दूरी बना ली। भाजपा विधायक अरविंद पांडेय ने विपक्ष के इस रवैये की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह सदन की परंपरा का अपमान है। सत्ता पक्ष के विधायकों ने इस पर निंदा प्रस्ताव लाने की मांग तक कर डाली। पलटवार करते हुए विपक्ष ने कहा कि जब जनसमस्याओं और विधायकों के सम्मान की अनदेखी हो रही है, तो ऐसे में फोटो खिंचवाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इस गतिरोध पर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने खेद जताते हुए कहा कि नए विधायकों के लिए यह एक यादगार मौका था, जो हाथ से निकल गया। इससे पहले सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई, विपक्षी विधायक अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए सीधे वेल में पहुंच गए और वहां काले झंडे लहराने लगे। विपक्ष 210 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार के मामले पर नियम 310 के तहत तत्काल चर्चा कराने पर अड़ा रहा। लगातार हो रही नारेबाजी और हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही को पहले सुबह 11:20 बजे और फिर दोबारा दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। इसी बीच भाजपा विधायकों ने भी चकराता की दो बेटियों को धमकी दिए जाने और उन पर कांग्रेस में शामिल होने का दबाव बनाए जाने का गंभीर मुद्दा उठाया, जिससे सदन में तीखी नोकझोंक हुई।

गैरसैंण जनभावनाओं का प्रतीक, पर्वतीय विकास हमारी प्राथमिकता: मुख्यमंत्री
हंगामे के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बयान में कहा, "गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं और हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। सरकार का सतत प्रयास है कि ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में सत्रों के आयोजन के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, जन-अपेक्षाओं और विकास से जुड़े विषयों को शीर्ष प्राथमिकता मिले। गैरसैंण की भूमिका को सशक्त बनाना और राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास को गति देना हमारी प्रतिबद्धता है। हमारी सरकार जनभावनाओं के अनुरूप सुशासन के संकल्प के साथ काम कर रही है।"