देहरादून। उत्तराखंड के राजकीय विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध डिग्री कॉलेजों में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के छात्रसंघ चुनावों में 50 प्रतिशत पद छात्राओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे। शासन ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को छात्रसंघ संविधान में आवश्यक संशोधन कर इस नई व्यवस्था को इसी शैक्षणिक सत्र से तत्काल लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव को लेकर शासन ने बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रसंघों में छात्राओं को 50 प्रतिशत पदों पर प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। नई व्यवस्था इसी शैक्षणिक सत्र से लागू करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके लिए सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को छात्रसंघ संविधान में आवश्यक संशोधन करने को कहा गया है। सचिव उच्च शिक्षा डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि राज्य के राजकीय विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में 66 प्रतिशत से अधिक छात्राएं अध्ययनरत हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की बढ़ती संख्या और उनकी सक्रिय सहभागिता को देखते हुए छात्रसंघों में उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से 50 प्रतिशत पद आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है। शासन के इस फैसले के बाद विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघों की मौजूदा प्रतिनिधित्व व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। विश्वविद्यालय स्तर पर छात्रसंघ संविधान में आवश्यक संशोधन के बाद विभिन्न पदों का वर्गीकरण किया जाएगा। इसके बाद इसी शैक्षणिक सत्र में होने वाले छात्रसंघ चुनाव नई आरक्षण व्यवस्था के तहत कराए जाएंगे। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पंचायतीराज और सहकारिता के बाद अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि छात्रसंघों में 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिलने से छात्राओं में नेतृत्व क्षमता विकसित होगी और वे विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों की निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी। नई व्यवस्था को उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। अब तक छात्रसंघ चुनावों में विभिन्न पदों पर छात्राओं की भागीदारी संस्थानवार अलग-अलग रही है। 50 प्रतिशत आरक्षण लागू होने के बाद छात्राओं के लिए प्रतिनिधित्व का स्पष्ट प्रावधान होगा। शासन के निर्देशों के बाद अब सभी राज्य विश्वविद्यालयों को अपने स्तर पर छात्रसंघ संविधान में संशोधन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके साथ ही महाविद्यालयों में भी चुनावी प्रक्रिया को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जाएगा। ऐसे में आगामी छात्रसंघ चुनावों में छात्राओं की भूमिका और प्रतिनिधित्व पहले की तुलना में अधिक व्यापक होने की संभावना है।

