भव्य कुंभ 2027 मेले की शुरुआत से पहले हरिद्वार में 408 करोड़ की सफाई परियोजनाओं के लिए केंद्रीय मंजूरी का इंतजार

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देहरादून। विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक समागम 'हरिद्वार कुंभ 2027' को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। आस्था के इस महापर्व में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को गंगा की निर्मल और अविरल धारा का उपहार देने के लिए केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर आश्वस्त किया है कि कुंभ मेले के दौरान गंगा की स्वच्छता और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए 'नमामि गंगे' कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसी वर्ष फरवरी में नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से भेंट कर कुंभ की भव्यता और गंगा की शुद्धता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के अंतर्गत 408.82 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को जल्द स्वीकृति देने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री का तर्क था कि 2027 में जनवरी से अप्रैल तक चलने वाले इस मेले में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे, जिनके लिए गंगा की स्वच्छता सर्वाेच्च प्राथमिकता है। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार राज्य के प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर रही है। नमामि गंगे के तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। ठोस एवं तरल अपशिष्ट का वैज्ञानिक निस्तारण।मल-कीचड़ उपचार संयंत्रों की स्थापना और मजबूती। नदी की सतह और प्रमुख स्नानागारों व घाटों की नियमित सफाई। रोगवाहक नियंत्रण और सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करना। केंद्र सरकार ने उत्तराखंड के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को तृतीय पक्ष मूल्यांकन के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स  नई दिल्ली को भेज दिया है। संस्थान की रिपोर्ट प्राप्त होते ही बजट आवंटन और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया है कि जल शक्ति मंत्रालय हरिद्वार कुंभ के सुव्यवस्थित और सफल आयोजन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस बार का कुंभ न केवल धार्मिक दृष्टि से भव्य होगा, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी 'सतत' बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि गंगा की अविरलता को बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक और कुशल प्रबंधन का उपयोग किया जाएगा। केंद्र और राज्य के इस साझा समन्वय से यह सुनिश्चित होगा कि कुंभ में आने वाला हर भक्त माँ गंगा के स्वच्छ जल में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित कर सके। हरिद्वार कुंभ-2027 केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आध्यात्मिक और स्वच्छ छवि को प्रस्तुत करने का अवसर है। केंद्र की इस सहायता से उत्तराखंड सरकार की कुंभ तैयारियों को नई ऊर्जा मिली है।