'सोना-आभूषण ले जाओ, मंदिर मत तोड़ो': सीएम योगी ने सुनाया सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक किस्सा, गजनवी के काले सच का किया खुलासा

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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर में 'भारतीय ज्ञान परंपरा' विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार को संबोधित करते हुए इतिहास का एक बड़ा दृष्टांत साझा किया है। मुख्यमंत्री ने 11वीं सदी के बर्बर आक्रांता महमूद गजनवी के भारत आक्रमण के असली मकसद का खुलासा करते हुए कहा कि विदेशी आक्रांताओं का ध्येय केवल धन-दौलत लूटना नहीं, बल्कि भारत की महान सनातन परंपरा को जड़ से मिटाना था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए महमूद गजनवी के सोमनाथ मंदिर पर हमले का प्रसंग सुनाया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि गजनवी का उद्देश्य केवल भारत की संपत्ति लूटना नहीं था, बल्कि सनातन परंपरा और देश की ज्ञान विरासत को कमजोर करना भी था। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुजारियों ने गजनवी से मंदिर और मूर्ति को नुकसान न पहुंचाने की अपील करते हुए धन-संपत्ति ले जाने की पेशकश की थी, लेकिन उसने इसे स्वीकार नहीं किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, पुजारियों ने कहा था कि यदि उसका उद्देश्य धन-संपत्ति हासिल करना है तो वह सोना और आभूषण ले जाए, लेकिन मंदिर को नुकसान न पहुंचाए। योगी ने अपने संबोधन में कहा कि गजनवी ने जवाब दिया कि वह जो कुछ मिलेगा, उसे लेकर जाएगा, लेकिन उसका मुख्य उद्देश्य भारत की सनातन परंपरा को नष्ट करना है। मुख्यमंत्री ने इस प्रसंग को भारत की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा पर हुए ऐतिहासिक आक्रमणों के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की पहचान प्राचीन काल में उसकी समृद्ध ज्ञान परंपरा के कारण रही है। उनके मुताबिक विदेशी आक्रमणकारियों ने भारत के वैभव के साथ-साथ ज्ञान और बौद्धिक विरासत को भी प्रभावित करने का प्रयास किया। उन्होंने मंदिरों और प्राचीन शिक्षण संस्थानों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने पाणिनि, पतंजलि, आयुर्वेद के आचार्यों और चाणक्य जैसी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान विरासत को प्रमाणों के साथ दुनिया के सामने रखने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को प्राचीन काल में ‘विश्वगुरु’ के रूप में उसकी ज्ञान-संपदा के कारण पहचान मिली। उनके अनुसार, तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्र भारतीय ज्ञान परंपरा की व्यापकता के उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री ने नई पीढ़ी को इस विरासत से परिचित कराने और प्राचीन पांडुलिपियों, शिलालेखों तथा अन्य ऐतिहासिक स्रोतों के संरक्षण पर भी जोर दिया। गोरखनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अतीत के प्रसंगों के साथ वर्तमान समय में भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने की जरूरत को जोड़ा। उन्होंने कहा कि इतिहास और विरासत से जुड़े विषयों को प्रमाणों के आधार पर समझने तथा उन्हें आधुनिक संदर्भों में नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है। हालांकि, सोमनाथ और गजनवी से जुड़ा पुजारियों और संवाद वाला प्रसंग इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत ऐतिहासिक विवरण है। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे मुख्यमंत्री के कथन के रूप में दर्ज किया गया है।