आधार में फर्जीवाड़े पर लगाम: जन्मतिथि बदलने के नियम होंगे बेहद सख्त, 15 अक्तूबर से लागू होगी नई व्यवस्था

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लखनऊ। आधार कार्ड में बार-बार जन्मतिथि बदलकर फर्जीवाड़ा करने वालों पर अब नकेल कसने जा रही है। उत्तर प्रदेश में आधार कार्ड में दूसरी बार या उससे अधिक बार जन्मतिथि में बदलाव कराने के नियमों को अत्यंत सख्त बनाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा तैयार की जा रही इस नई और कड़ी व्यवस्था को आगामी 15 अक्तूबर से लागू किए जाने की पूरी उम्मीद है।

यूपी में आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलवाने वालों के लिए आने वाले दिनों में नियम और सख्त हो सकते हैं। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की व्यवस्था के तहत आधार में जन्मतिथि सामान्य प्रक्रिया से केवल एक बार अपडेट की जा सकती है। दूसरी बार जन्मतिथि में बदलाव के लिए पहले से ही विशेष प्रक्रिया निर्धारित है, लेकिन अब इस प्रक्रिया को और कड़ा किए जाने की तैयारी है। नई व्यवस्था 15 अक्तूबर से लागू होने की उम्मीद है। पिछले कुछ दिनों से दूसरी बार जन्मतिथि में बदलाव से जुड़े आवेदनों पर रोक लगी हुई है। बताया जा रहा है कि यूआईडीएआई स्तर पर नई प्रक्रिया तैयार की जा रही है। इसके लागू होने के बाद दूसरी या उसके बाद जन्मतिथि में संशोधन कराने के लिए आवेदकों को पहले की तुलना में अधिक कड़े सत्यापन से गुजरना पड़ सकता है। मौजूदा नियमों के मुताबिक आधार में जन्मतिथि सामान्य प्रक्रिया के तहत एक ही बार अपडेट कराई जा सकती है। यदि किसी व्यक्ति को दूसरी बार जन्मतिथि में संशोधन की वास्तविक आवश्यकता है तो उसे आधार केंद्र पर आवेदन करने के साथ जन्मतिथि प्रमाणित करने वाले वैध दस्तावेज उपलब्ध कराने होते हैं। दस्तावेजों की जांच और सत्यापन के बाद ही विशेष परिस्थितियों में बदलाव की अनुमति दी जाती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य जन्मतिथि में बार-बार बदलाव के जरिए होने वाले संभावित फर्जीवाड़े को रोकना है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार दूसरी या एक से अधिक बार जन्मतिथि बदलने से संबंधित बड़ी संख्या में आवेदन सामने आते रहे हैं। इनमें युवाओं की संख्या भी उल्लेखनीय बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश और बिहार में जन्मतिथि में एक से अधिक बार संशोधन से जुड़े आवेदन अधिक संख्या में सामने आते हैं। अधिकारियों के अनुसार कुछ मामलों में नौकरी और अन्य अवसरों से संबंधित पात्रता के लिए जन्मतिथि में बदलाव की कोशिश की जाती है। उम्र सीमा से जुड़े प्रावधानों का लाभ लेने के उद्देश्य से जन्मतिथि में हेरफेर की संभावना को देखते हुए व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। नई प्रक्रिया के तहत वास्तविक और दस्तावेजों से प्रमाणित मामलों तथा गलत तरीके से जन्मतिथि बदलवाने के प्रयासों के बीच अंतर करने पर जोर रहेगा। इसका मतलब यह होगा कि जिन लोगों के दस्तावेजों में वास्तविक त्रुटि या विशेष परिस्थिति के कारण संशोधन जरूरी है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा। आधार आज पहचान और विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी सेवाओं में महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल होता है। ऐसे में उसमें दर्ज जन्मतिथि की शुद्धता भी महत्वपूर्ण है। बार-बार बदलाव की सुविधा सीमित करने से रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि नई व्यवस्था की अंतिम प्रक्रिया और शर्तें यूआईडीएआई की ओर से औपचारिक रूप से जारी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी। फिलहाल दूसरी बार जन्मतिथि संशोधन से जुड़े आवेदकों को नई प्रक्रिया का इंतजार करना पड़ रहा है। 15 अक्तूबर से प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद जन्मतिथि संशोधन की प्रक्रिया और सत्यापन का स्वरूप अधिक स्पष्ट हो सकेगा।