विश्व आयुर्वेद दिवस: सीएम धामी ने की भगवान धन्वन्तरि की पूजा, प्रदेश की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की

Blog
 Image

देहरादून। विश्व आयुर्वेद दिवस एवं धन्वन्तरि जयंती के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास स्थित मंदिर में भगवान धन्वन्तरि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समस्त प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं सर्वांगीण खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली और प्राचीन ऋषि-मुनियों की अमूल्य धरोहर है।

आयुर्वेद दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान धन्वन्तरि की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के आरोग्य, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और समृद्ध विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच आयुर्वेद की प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आयुर्वेद भारतीय संस्कृति की ऐसी चिकित्सा परंपरा है, जिसका उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को स्वस्थ बनाए रखना भी है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, रोगों से बचाव और शरीर तथा मन के संतुलन में आयुर्वेद की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया स्वास्थ्य को लेकर प्राकृतिक और पारंपरिक उपायों की ओर भी देख रही है, ऐसे समय में भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां नए सिरे से वैश्विक पहचान हासिल कर रही हैं। आयुर्वेद दिवस का आयोजन महज एक परंपरागत धार्मिक-सांस्कृतिक अवसर तक सीमित नहीं माना जा सकता। यह भारतीय चिकित्सा ज्ञान की उस विरासत को याद करने का अवसर भी है, जिसने सदियों से स्वास्थ्य और जीवनशैली को प्रकृति के साथ जोड़कर देखने की दृष्टि विकसित की। भगवान धन्वन्तरि को भारतीय परंपरा में चिकित्सा और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में मुख्यमंत्री द्वारा पूजा-अर्चना के साथ स्वस्थ समाज की कामना करना आयुर्वेद की इसी व्यापक अवधारणा को सामने रखता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद और भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल रही है। सरकार के स्तर पर आयुर्वेद को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ आगे बढ़ाने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य के लिए आयुर्वेद की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यहां प्राकृतिक संसाधनों, औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक उपचार ज्ञान की समृद्ध परंपरा मौजूद है। ऐसे में आयुर्वेद को केवल उपचार की पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, स्थानीय ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों से जोड़कर देखने की जरूरत है। आयुर्वेद दिवस का संदेश भी यही है कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ भारतीय पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और प्रमाण आधारित अनुसंधान के साथ आगे बढ़ाया जाए। यदि आयुर्वेद की प्राचीन विरासत को आधुनिक शोध, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जनजागरूकता से जोड़ा जाता है, तो यह स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्तराखंड के लिए भी नई संभावनाओं का आधार बन सकता है।